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  ब्रह्मचारी कृष्णदत्त जी के प्रवचनों में दैवी यज्ञ,नवरात्र पर्व (कौन है ब्रह्मचारी कृष्ण दत्त जी) 27 सितम्बर सन् 1942 को , उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के ग्राम खुर्रमपुर , सलेमाबाद में एक विशेष बालक ने जन्म लिया। जन्म से ही जब भी बालक सीधा , श्वासन की मुद्रा में , कुछ अन्तराल लेट जाता या लिटा दिया जाता , तो बालक की गर्दन दायें बायें हिलने लगती और विभिन्न ऋषि-मुनियों के चिन्तन और घटनाओं पर आधारित 45 मिनट तक एक दिव्य प्रवचन होता। कुछ समय बाद आवाज जब कुछ स्पष्ट हुई तो बोध हुआ कि यह आत्मा सृष्टि के आदिकाल से ही विभिन्न कालों में श्रृंगी ऋषि की उपाधि से विभूषित और आदि ब्रह्मा के शाप के कारण इस युग में जन्म लेने का कारण बनी। और इस जन्म में अपठित रहने की स्थिति में भी जैसे ही यह शरीर श्वासन की मुद्रा में जाता , तो कुछ अन्तराल बाद स्वतः ही योग समाधि की स्थिति बन जाती और इस दिव्यात्मा का पूर्व जन्मों का ज्ञान उद्बुद्ध हो जाता , और उनके प्रवचनों में ब्रह्माण्ड की विशालता , प्रत्येक लोक में जीवन की अनिवार्यता का बोध , सृष्टि का उद्देश्य , पूर्व कालों में विज्ञान की विशालता का दिग्दर...
  ब्रह्मचारी कृष्णदत्त जी के प्रवचनों में पितर पूजन व श्राद्ध का अभिप्राय एक पुरातन ऋषि का दिव्य जन्म   (कौन है ब्रह्मचारी कृष्ण दत्त जी) 27 सितम्बर सन् 1942 को , उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के ग्राम खुर्रमपुर , सलेमाबाद में एक विशेष बालक ने जन्म लिया। जन्म से ही जब भी बालक सीधा , श्वासन की मुद्रा में , कुछ अन्तराल लेट जाता या लिटा दिया जाता , तो बालक की गर्दन दायें बायें हिलने लगती और विभिन्न ऋषि-मुनियों के चिन्तन और घटनाओं पर आधारित 45 मिनट तक एक दिव्य प्रवचन होता। कुछ समय बाद आवाज जब कुछ स्पष्ट हुई तो बोध हुआ कि यह आत्मा सृष्टि के आदिकाल से ही विभिन्न कालों में श्रृंगी ऋषि की उपाधि से विभूषित और आदि ब्रह्मा के शाप के कारण इस युग में जन्म लेने का कारण बनी। और इस जन्म में अपठित रहने की स्थिति में भी जैसे ही यह शरीर श्वासन की मुद्रा में जाता , तो कुछ अन्तराल बाद स्वतः ही योग समाधि की स्थिति बन जाती और इस दिव्यात्मा का पूर्व जन्मों का ज्ञान उद्बुद्ध हो जाता , और उनके प्रवचनों में ब्रह्माण्ड की विशालता , प्रत्येक लोक में जीवन की अनिवार्यता का बोध , सृष्टि का उद्देश...